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जून, 2020 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

इन दिनों लोकडाउन में भी हम बहुत व्यस्त हैं, लेकिन जब वक्त मिले ये पोस्ट जरूर पढ़ लेना। जीवन में 100% फर्क अवश्य दिखेगा।* 🙏

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((  नोट ः 99%  देने के बाद 1% और दिया जाता है तब जाकर सफलता मिलती है आप यहां तक आए और पोस्ट पढ़ रहे हैं़ पोस्ट तो आप का 99 परसेंट पूरा हुआ ,लेकिन अब 1% परसेंट की बारी है वो क्या है आपका    फोकस  , वादा है आपसे अगर यह और आपने रख लिया तो आज आप एक नई और बहुत बड़ी सीख लेकर जाओगे अपने पास शुकरिया )) * एक तत्त्वनिष्ठ ज्ञान दान * "अजी सुनते हो? राहूल को कम्पनी में जाकर टिफ़िन दे आओगे क्या?" "क्यों आज राहूल टिफ़िन लेकर नहीं गया।?" शरद राव ने पुछा। आज राहूल की कम्पनी के चेयरमैन आ रहे हैं, इसलिये राहूल सुबह 7 बजे ही निकल गया और इतनी सुबह खाना नहीं बन पाया था।" "ठीक हैं। दे आता हूँ मैं।" शरद राव ने हाथ का पेपर रख दिया और वो कपडे बदलने के लिये कमरे में चले गये। पुष्पाबाई ने  राहत की साँस ली। शरद राव तैयार हुए मतलब उसके और राहूल के बीच हुआ विवाद उन्होंने नहीं सुना था। विवाद भी कैसा ? हमेशा की तरह राहूल का अपने पिताजी पर दोषारोपण करना और पुष्पाबाई का अपनी पति के पक्ष में बोलना। * विषय भी वही! हमारे पिताजी ने हमारे लिये क्या किया? मेरे लिये क्या किया हैं ...

ये कहानी आपके जीने की सोच बदल देगी !

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------------------------------------------------------- एक दिन एक किसान का बैल कुएँ में गिर गया...!! वह बैल घंटों ज़ोर -ज़ोर से रोता रहा..!!और... किसान सुनता रहा और विचार करता रहा कि उसे क्या करना चाहिऐ और क्या नहीं..!! उसने निर्णय लिया कि चूंकि बैल काफी बूढा हो चूका... था  अतः उसे बचाने से कोई लाभ होने वाला नहीं था.. और इसलिए उसे कुएँ में ही दफना देना चाहिऐ..!! किसान ने अपने सभी पड़ोसियों को मदद के लिए बुलाया सभी ने एक-एक फावड़ा पकड़ा और कुएँ में मिट्टी डालनी शुरू कर दी...! जैसे ही बैल कि समझ में आया कि यह क्या हो रहा है वह और ज़ोर-ज़ोर से चीख़ चीख़ कर रोने लगा और फिर ,अचानक वह आश्चर्यजनक रुप से शांत हो गया..! सब लोग चुपचाप कुएँ में मिट्टी डालते रहे तभी किसान ने कुएँ में झाँका तो वह आश्चर्य से सन्न 😱रह गया.. अपनी पीठ पर पड़ने वाले हर फावड़े की मिट्टी के साथ वह बैल एक आश्चर्यजनक हरकत कर रहा था...!! वह हिल-हिल कर उस मिट्टी को नीचे गिरा देता था! और फिर एक कदम बढ़ाकर उस पर चढ़ जाता था...! जैसे-जैसे किसान तथा उसके पड़ोसी उस पर फावड़ों से मिट्टी गिराते वैसे -वैसे वह हिल-हिल कर उस मिट्...