इन दिनों लोकडाउन में भी हम बहुत व्यस्त हैं, लेकिन जब वक्त मिले ये पोस्ट जरूर पढ़ लेना। जीवन में 100% फर्क अवश्य दिखेगा।* 🙏
(( नोट ः 99% देने के बाद 1% और दिया जाता है तब जाकर सफलता मिलती है आप यहां तक आए और पोस्ट पढ़ रहे हैं़ पोस्ट तो आप का 99 परसेंट पूरा हुआ ,लेकिन अब 1% परसेंट की बारी है वो क्या है आपका फोकस , वादा है आपसे अगर यह और आपने रख लिया तो आज आप एक नई और बहुत बड़ी सीख लेकर जाओगे अपने पास शुकरिया )) * एक तत्त्वनिष्ठ ज्ञान दान * "अजी सुनते हो? राहूल को कम्पनी में जाकर टिफ़िन दे आओगे क्या?" "क्यों आज राहूल टिफ़िन लेकर नहीं गया।?" शरद राव ने पुछा। आज राहूल की कम्पनी के चेयरमैन आ रहे हैं, इसलिये राहूल सुबह 7 बजे ही निकल गया और इतनी सुबह खाना नहीं बन पाया था।" "ठीक हैं। दे आता हूँ मैं।" शरद राव ने हाथ का पेपर रख दिया और वो कपडे बदलने के लिये कमरे में चले गये। पुष्पाबाई ने राहत की साँस ली। शरद राव तैयार हुए मतलब उसके और राहूल के बीच हुआ विवाद उन्होंने नहीं सुना था। विवाद भी कैसा ? हमेशा की तरह राहूल का अपने पिताजी पर दोषारोपण करना और पुष्पाबाई का अपनी पति के पक्ष में बोलना। * विषय भी वही! हमारे पिताजी ने हमारे लिये क्या किया? मेरे लिये क्या किया हैं ...